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(57) मारीच-वध के पश्चात् श्रीराम की आशंका और सीता की चिंता

(57)
मारीच-वध के पश्चात् श्रीराम की आशंका और सीता की चिंता

 

मारीच का वध करके आश्रम की ओर प्रस्थान

मृग का रूप धारण करके श्रीराम को आश्रम से दूर ले जाने वाला राक्षस मारीच अंततः उनके बाणों से मारा गया। उसका वध करते ही श्रीराम को माता सीता की याद आई। वे बिना समय गँवाए शीघ्रता से आश्रम की ओर लौटने लगे। उनके मन में यही विचार था कि सीता आश्रम में उनकी प्रतीक्षा कर रही होंगी। वे जितनी जल्दी संभव हो, उनके पास पहुँचना चाहते थे।

 

सियारिन की भयंकर आवाज से श्रीराम का विचलित होना

श्रीराम तेजी से आश्रम की ओर बढ़ रहे थे कि तभी पीछे की ओर से एक सियारिन की अत्यंत कठोर और भयावह आवाज सुनाई दी। उसकी चीत्कार इतनी डरावनी थी कि सुनते ही श्रीराम के मन में अनहोनी की आशंका उत्पन्न हो गई। वे उस आवाज को सुनकर चिंतित हो उठे। उन्हें लगा कि प्रकृति मानो किसी आने वाले संकट का संकेत दे रही है।

 

मारीच के छल को समझकर सीता की चिंता

सियारिन की आवाज सुनकर श्रीराम मन-ही-मन विचार करने लगे कि यह अवश्य किसी अशुभ घटना का संकेत है। उनके मन में सबसे पहले माता सीता की कुशलता का विचार आया। वे सोचने लगे कि कहीं किसी राक्षस ने सीता को हानि तो नहीं पहुँचाई?

उन्हें मारीच की अंतिम पुकार याद आने लगी। मारीच ने मरते समय जान-बूझकर श्रीराम की आवाज की नकल करते हुए ‘हा लक्ष्मण! मैं मारा गया’ कहकर पुकार लगाई थी। श्रीराम समझ गए कि यह पुकार केवल उन्हें धोखा देने के लिए नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य लक्ष्मण को भी आश्रम से दूर बुलाना था। उन्हें आशंका हुई कि सीता उस आवाज को सुनकर अवश्य लक्ष्मण को उनकी सहायता के लिए भेजेंगी और लक्ष्मण उन्हें अकेला छोड़कर आश्रम से निकल पड़ेंगे।

श्रीराम को अब मारीच की पूरी योजना समझ में आने लगी। वे सोचने लगे कि राक्षस पहले से ही सीता का अपहरण करने या उन्हें हानि पहुँचाने की योजना बना रहे थे। इसी षड्यंत्र के अंतर्गत मारीच स्वर्णमृग बनकर उन्हें आश्रम से दूर ले गया था। उसके द्वारा निकाली गई अंतिम पुकार भी उसी योजना का हिस्सा थी।

 

राक्षसों के वैर और आने वाले संकट की आशंका

श्रीराम के मन में अनेक प्रकार की चिंताएँ उठने लगीं। वे सोचने लगे कि जनस्थान में अनेक राक्षसों का वध करने के कारण सभी राक्षस उनसे शत्रुता रखते हैं। ऐसे में यदि वे और लक्ष्मण दोनों आश्रम से दूर हो गए होंगे, तो सीता वहाँ अकेली कैसे सुरक्षित रह पाएँगी?

वन में दिखाई देने वाले अनेक अपशकुन भी उनके मन को व्याकुल कर रहे थे। इन सभी संकेतों को देखकर उनका भय बढ़ता जा रहा था। वे अपने मन को नियंत्रित करते हुए और शीघ्रता से आश्रम की ओर चल पड़े।

 

जनस्थान में अपशकुन और श्रीराम की बढ़ती व्याकुलता

मारीच के छल को याद करते हुए श्रीराम जनस्थान पहुँचे। उनका हृदय सीता की चिंता से अत्यंत दुःखी था। वे उदास और व्याकुल होकर आगे बढ़ रहे थे। उसी समय वन के मृग और पक्षी उनके सामने दिखाई देने लगे। वे श्रीराम को अपनी बाईं ओर रखते हुए विचित्र और भयावह आवाजें निकाल रहे थे।

वन के पशु-पक्षियों का ऐसा व्यवहार देखकर श्रीराम की आशंका और गहरी हो गई। उन्हें लगने लगा कि ये सभी घटनाएँ किसी बड़े अनिष्ट की ओर संकेत कर रही हैं। वे उन अशुभ संकेतों को देखकर और भी तेज गति से अपने आश्रम की ओर चल पड़े। अब उनके मन में केवल एक ही इच्छा थी कि वे शीघ्र सीता के पास पहुँच जाएँ और उन्हें सुरक्षित देख सकें।

 

मार्ग में लक्ष्मण को देखकर श्रीराम का चिंतित होना

आश्रम की ओर जाते हुए श्रीराम को सामने से लक्ष्मण आते दिखाई दिए। लक्ष्मण के चेहरे की कान्ति फीकी पड़ गई थी और उनके मुख पर गहरी उदासी दिखाई दे रही थी। कुछ ही क्षणों में दोनों भाई एक-दूसरे के निकट आ गए।

लक्ष्मण स्वयं भी दुःख और चिंता में डूबे हुए थे। उन्हें माता सीता को अकेला छोड़कर आने का दुख था। दूसरी ओर, श्रीराम उन्हें अकेले लौटते देखकर और अधिक व्याकुल हो उठे। वे समझ गए कि लक्ष्मण सीता को आश्रम में अकेला छोड़कर उनके पास आए हैं। यह देखकर श्रीराम को क्रोध और दुःख दोनों हुए, क्योंकि उन्हें पहले से ही किसी अनहोनी की आशंका सता रही थी।

 

लक्ष्मण पर श्रीराम का क्रोध और सीता की कुशलता की चिंता

श्रीराम ने लक्ष्मण का बायाँ हाथ पकड़ लिया। उनके मन में सीता की सुरक्षा को लेकर इतना दुःख और भय था कि वे अपने भावों को रोक नहीं सके। पहले उन्होंने कठोर वाणी में लक्ष्मण से कहा कि उन्होंने सीता को अकेला छोड़कर बहुत अनुचित कार्य किया है।

उन्होंने लक्ष्मण से पूछा कि क्या आश्रम में सीता सकुशल हैं? श्रीराम को पूरा विश्वास होने लगा था कि वन में विचरने वाले राक्षसों ने अवश्य सीता पर आक्रमण किया होगा। उन्हें भय था कि कहीं राक्षसों ने उन्हें मार न दिया हो या उनका अपहरण करके अपने साथ न ले गए हों।

 

अपशकुनों को देखकर श्रीराम का भय और दुःख

श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि उनके आसपास लगातार अनेक अशुभ संकेत दिखाई दे रहे हैं। वन के मृग, सियार और पक्षी असामान्य व्यवहार कर रहे हैं। मृगों के समूह, सियारों की भयानक आवाजें और सभी दिशाओं में पक्षियों की विचित्र चीत्कार उनके मन में अनिष्ट की आशंका उत्पन्न कर रही हैं।

उन्हें ऐसा लग रहा था मानो चारों दिशाएँ किसी आने वाले संकट की सूचना दे रही हों। उन्होंने अत्यंत दुःखी होकर लक्ष्मण से पूछा कि क्या वे दोनों जनकनन्दिनी सीता को जीवित, स्वस्थ और सकुशल देख पाएँगे? इस प्रश्न में एक पति की अपनी प्रिय पत्नी के प्रति गहरी चिंता और उसे खो देने का भय स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

 

मारीच के छल का स्मरण और श्रीराम की अंतिम आशंका

इसके बाद श्रीराम ने लक्ष्मण को मारीच के छल की पूरी घटना बताई। उन्होंने कहा कि वह राक्षस मृग का अद्भुत रूप धारण करके उन्हें अपने पीछे दूर वन में ले गया था। उसे पकड़ने और मारने के लिए उन्हें बहुत परिश्रम करना पड़ा। अंततः जब उन्होंने उसे बाण से मार गिराया, तब उसका वास्तविक राक्षसी रूप प्रकट हो गया।

श्रीराम ने अत्यंत दुःखी होकर कहा कि मारीच की इस चाल के कारण उनका मन बहुत अशांत हो रहा है। उनकी बाईं आँख भी लगातार फड़क रही है, जो उन्हें किसी अनिष्ट का संकेत प्रतीत हो रहा है। उन्हें अब विश्वास होने लगा था कि आश्रम में सीता नहीं हैं।

वे मन-ही-मन अनेक आशंकाओं से घिर गए। उन्हें भय था कि कहीं कोई राक्षस सीता का अपहरण करके उन्हें अपने साथ न ले गया हो, कहीं उन्हें कोई हानि न पहुँचा दी गई हो अथवा वे किसी राक्षस के साथ मार्ग में ही न हों।

इस प्रकार श्रीराम का मन सीता की चिंता से अत्यंत व्याकुल हो उठा। मारीच के छल, वन में दिखाई देने वाले अपशकुन और लक्ष्मण का आश्रम से अकेले लौटना उनके हृदय में एक बड़े संकट की आशंका उत्पन्न कर चुके थे। अब वे शीघ्र आश्रम पहुँचकर सीता की वास्तविक स्थिति जानना चाहते थे।


प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. मारीच का वध करने के बाद श्रीराम शीघ्रता से आश्रम की ओर क्यों लौटने लगे?

उत्तर: मारीच का वध करने के बाद श्रीराम को माता सीता की याद आई। वे शीघ्र आश्रम पहुँचकर उनकी कुशलता जानना चाहते थे।

प्रश्न 2. सियारिन की भयंकर आवाज सुनकर श्रीराम के मन में क्या आशंका उत्पन्न हुई?

उत्तर: सियारिन की भयावह चीत्कार सुनकर श्रीराम को किसी अनिष्ट की आशंका हुई और वे माता सीता की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो उठे।

प्रश्न 3. मारीच ने मरते समय श्रीराम की आवाज की नकल करके क्यों पुकार लगाई थी?

उत्तर: मारीच चाहता था कि उसकी पुकार सुनकर लक्ष्मण सीता के कहने पर आश्रम छोड़ दें और श्रीराम की सहायता के लिए चले जाएँ।

प्रश्न 4. श्रीराम को मारीच के षड्यंत्र का रहस्य कैसे समझ में आया?

उत्तर: मारीच की अंतिम पुकार और स्वर्णमृग बनकर उन्हें आश्रम से दूर ले जाने की घटना पर विचार करके श्रीराम को षड्यंत्र समझ आया।

प्रश्न 5. जनस्थान के राक्षस श्रीराम से शत्रुता क्यों रखते थे?

उत्तर: श्रीराम ने जनस्थान में अनेक राक्षसों का संहार किया था। इसी कारण वहाँ के राक्षस उनसे वैर रखते थे और सीता को हानि पहुँचाना चाहते थे।

प्रश्न 6. वन के मृगों और पक्षियों का व्यवहार देखकर श्रीराम क्यों चिंतित हो गए?

उत्तर: वन के मृग और पक्षी विचित्र तथा भयावह आवाजें निकाल रहे थे। उनका असामान्य व्यवहार श्रीराम को किसी बड़े अनिष्ट का संकेत लगा।

प्रश्न 7. लक्ष्मण को सामने से आते देखकर श्रीराम की क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर: लक्ष्मण को अकेले लौटते देखकर श्रीराम चिंतित और क्रोधित हुए। उन्हें आशंका हुई कि सीता को अकेला छोड़ना किसी अनहोनी का कारण बना होगा।

प्रश्न 8. श्रीराम ने लक्ष्मण को उनके किस कार्य के लिए अनुचित ठहराया?

उत्तर: श्रीराम ने लक्ष्मण को राक्षसों से सेवित निर्जन वन में सीता को अकेला छोड़कर अपने पास आने के लिए अनुचित ठहराया।

प्रश्न 9. श्रीराम ने सीता की सुरक्षा के विषय में लक्ष्मण से क्या पूछा?

उत्तर: श्रीराम ने लक्ष्मण से पूछा कि क्या सीता आश्रम में सकुशल हैं और क्या वे दोनों उन्हें जीवित तथा स्वस्थ देख पाएँगे।

प्रश्न 10. श्रीराम को किन अपशकुनों से सीता के संकट में होने की आशंका हुई?

उत्तर: मृगों के विचित्र व्यवहार, सियारों की भयानक आवाजों, पक्षियों की चीत्कार और अपनी बाईं आँख फड़कने से श्रीराम को अनिष्ट की आशंका हुई।

प्रश्न 11. श्रीराम को मारीच का वास्तविक स्वरूप कब दिखाई दिया?

उत्तर: जब श्रीराम ने मृगरूपधारी मारीच को अपने बाण से मार गिराया, तब उसका वास्तविक राक्षसी स्वरूप प्रकट हो गया।

प्रश्न 12. श्रीराम की बाईं आँख फड़कने से उनके मन में क्या विचार आया?

उत्तर: श्रीराम को लगा कि उनकी बाईं आँख फड़कना किसी अनिष्ट का संकेत है और आश्रम में सीता अब सुरक्षित रूप से उपस्थित नहीं हैं।

प्रश्न 13. लक्ष्मण को देखकर श्रीराम ने उनका हाथ पकड़कर क्या कहा?

उत्तर: श्रीराम ने लक्ष्मण का बायाँ हाथ पकड़कर पहले कठोर वाणी में उन्हें सीता को अकेला छोड़कर आने के लिए अनुचित ठहराया।

प्रश्न 14. मारीच की अंतिम पुकार के पीछे कौन-सा उद्देश्य छिपा था?

उत्तर: मारीच का उद्देश्य श्रीराम और लक्ष्मण दोनों को आश्रम से दूर करना था, ताकि राक्षस सीता को अकेला पाकर अपना षड्यंत्र पूरा कर सकें।

प्रश्न 15. इस प्रसंग में श्रीराम के मन की प्रमुख भावनाएँ कौन-कौन सी थीं?

उत्तर: इस प्रसंग में श्रीराम के मन में सीता के प्रति प्रेम, उनकी सुरक्षा की चिंता, अनिष्ट की आशंका, दुःख और लक्ष्मण के प्रति क्रोध दिखाई देते हैं।