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त्रिपथगा तट की वह पावन रात्रि

 

रात की नीरवता धीरे-धीरे समाप्त हो रही थी। पूर्व दिशा में हल्की अरुणिमा फैलने लगी थी। ओस से भीगे तिनकों और पत्तों के बिछौने पर दो तेजस्वी राजकुमार—अयोध्या के रत्न, राम और लक्ष्मण—गहन विश्राम में थे। पास ही तप के धनी, महान ऋषि विश्वामित्र ध्यानमग्न बैठे थे। जैसे ही प्रभात की पहली किरण धरती को स्पर्श करने लगी, उन्होंने करुणा और स्नेह से भरी वाणी में पुकारा—

 

“उठो, नरश्रेष्ठ राम! तुम्हारे जैसे पुत्र को पाकर माता कौसल्या धन्य हैं। देखो, प्रातःकाल की संध्या का समय हो रहा है। देवकार्य की पूर्ति का यह पावन क्षण व्यर्थ न जाने दो।”

 

ऋषि की मधुर वाणी सुनते ही दोनों राजकुमार उठ बैठे। उनकी आँखों में नींद नहीं, बल्कि कर्तव्य की चमक थी। वे समीप की पवित्र धारा में स्नान करने गए। शीतल जल ने जैसे उनके तन के साथ मन को भी निर्मल कर दिया। स्नान के पश्चात् उन्होंने श्रद्धा से देवताओं का तर्पण किया और फिर एकाग्र होकर गायत्री मंत्र का जप आरम्भ किया। उनकी मधुर, गंभीर ध्वनि वातावरण में गूँज उठी—मानो स्वयं प्रकृति भी उस पवित्र उच्चारण में सहभागी हो।

नित्यकर्म पूर्ण कर दोनों भाइयों ने आदरपूर्वक विश्वामित्र को प्रणाम किया। उनके मुख पर प्रसन्नता और उत्साह झलक रहा था। वे आगे की यात्रा के लिए तत्पर हो उठे। चलते-चलते वे उस अद्भुत स्थान पर पहुँचे जहाँ पावन गंगा और सरयू का संगम था। त्रिपथगा गंगा का दिव्य प्रवाह, स्वर्णिम प्रभात में, आकाश की लालिमा को अपने जल में समेटे हुए था। उस दृश्य को देखकर दोनों भाइयों के हृदय में अद्भुत शांति और आनंद उमड़ पड़ा।

 

संगम के समीप ही एक अत्यंत पवित्र आश्रम था। वहाँ के वातावरण में तप की सुगंध थी—वर्षों की साधना से पवित्र हुआ वह स्थल मानो स्वयं तेज से आलोकित था। राम ने कौतूहल से विश्वामित्र से पूछा, “भगवन्! यह पावन आश्रम किसका है? यहाँ कौन महापुरुष निवास करते थे? हमारे मन में इसे जानने की तीव्र इच्छा हो रही है।”

 

विश्वामित्र मुस्कराए। उनकी आँखों में स्मृति की गहराई थी। वे बोले, “राम, यह स्थान अत्यंत पवित्र है। पूर्वकाल में यहाँ भगवान शिव ने घोर तप किया था। उसी समय कामदेव ने, अहंकार और अविवेक में, उनके ध्यान को भंग करने का प्रयास किया। शिव ने क्रोध से नेत्र खोले—उनकी दृष्टि की ज्वाला से कामदेव का शरीर भस्म हो गया। तभी से वह ‘अनंग’ कहलाया—अंगहीन। जिस भूमि पर उसके अंग गिरे, वह ‘अंगदेश’ के नाम से प्रसिद्ध हुई। यह वही तपोभूमि है।”

 

यह कथा सुनते ही राम और लक्ष्मण के मन में शिव के प्रति श्रद्धा और भी गहरी हो गई। आश्रम की पवित्रता अब उन्हें और भी दिव्य प्रतीत होने लगी। विश्वामित्र ने कहा, “आज की रात्रि हम यहीं विश्राम करेंगे। इन पावन नदियों के मध्य यह स्थान अत्यंत शुभ है।”

 

उधर आश्रम में निवास करने वाले मुनियों ने अपनी तपस्या से प्राप्त दिव्य दृष्टि द्वारा उनके आगमन का अनुभव कर लिया था। उनके हृदय में हर्ष की लहर दौड़ गई। वे तुरंत अतिथि-सत्कार की सामग्री लेकर आगे बढ़े। विश्वामित्र को अर्घ्य और पाद्य अर्पित किया गया, और राम-लक्ष्मण का भी अत्यंत आदरपूर्वक स्वागत हुआ।

 

संध्या ढलते-ढलते आश्रम में भक्ति और ज्ञान की मधुर चर्चा होने लगी। मुनियों ने विविध कथाओं द्वारा राजकुमारों का मनोरंजन किया। वातावरण में वेद-मंत्रों की ध्वनि गूँजने लगी। सबने मिलकर संध्यावंदन और जप किया। उस पावन स्थल पर अग्नि की लौ आकाश से संवाद करती प्रतीत होती थी।

 

रात्रि गहराई। तारों से भरा आकाश मानो धरती पर उतर आया था। मुनियों ने अतिथियों के लिए विश्राम का उपयुक्त स्थान सजाया। उस कामनापूर्ति करने वाले पवित्र आश्रम में विश्वामित्र और दोनों राजकुमार शांति और संतोष से भरकर विश्राम करने लगे।

 

नींद से पहले विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को अनेक मनोहर कथाएँ सुनाईं—धर्म, साहस और त्याग की कथाएँ। उन कथाओं के बीच गुरु और शिष्य के हृदय एक अदृश्य सूत्र में बँधते चले गए।

 

त्रिपथगा के तट पर बीती वह रात्रि केवल एक विश्राम नहीं थी; वह श्रद्धा, ज्ञान और भक्ति का अद्वितीय संगम थी—जहाँ प्रकृति, तप और राजसी तेज एक साथ आलोकित हो उठे थे।

 

 

 

Multiple Choice Questions (MCQs)

 

 

पाठ: “त्रिपथगा तट की वह पावन रात्रि”

 

1. प्रभात होने पर सबसे पहले किसने राम और लक्ष्मण को जगाया?

A. पक्षियों के कलरव ने

B. आश्रम के मुनियों ने

C. महर्षि विश्वामित्र ने

D. गंगा की ध्वनि ने

 

2. स्नान के बाद दोनों भाइयों ने सबसे पहले क्या किया?

A. भोजन किया

B. विश्राम किया

C. देवताओं का तर्पण किया

D. यात्रा प्रारम्भ की

 

3. राम और लक्ष्मण ने किस मंत्र का जप किया?

A. महामृत्युंजय मंत्र

B. गायत्री मंत्र

C. हनुमान चालीसा

D. विष्णु सहस्रनाम

 

4. दोनों भाई किस पवित्र स्थान पर पहुँचे?

A. यमुना तट

B. नर्मदा तट

C. गंगा और सरयू के संगम

D. गोदावरी तट

 

5. उस आश्रम में पूर्वकाल में किसने तप किया था?

A. ब्रह्मा ने

B. विष्णु ने

C. भगवान शिव ने

D. इन्द्र ने

 

6. कामदेव ने क्या प्रयास किया था?

A. यज्ञ किया

B. शिव का ध्यान भंग किया

C. आश्रम बसाया

D. गंगा स्नान किया

 

7. कामदेव को ‘अनंग’ क्यों कहा गया?

A. वह बहुत सुंदर था

B. वह देवताओं का प्रिय था

C. उसका शरीर नष्ट हो गया था

D. वह अंगदेश का राजा था

 

8. मुनियों को राम और लक्ष्मण के आगमन का ज्ञान कैसे हुआ?

A. किसी दूत से

B. स्वप्न में

C. दिव्य दृष्टि से

D. विश्वामित्र ने बताया

 

9. संध्या समय आश्रम में क्या हुआ?

A. युद्ध हुआ

B. उत्सव मनाया गया

C. वेद-मंत्रों का जप और संध्यावंदन हुआ

D. सभा भंग हो गई

 

10. रात्रि में विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को क्या सुनाया?

A. युद्ध की योजना

B. राज्य के नियम

C. धर्म, साहस और त्याग की कथाएँ

D. भविष्य की भविष्यवाणी