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🌸 रामबोला से तुलसीदास

मोह से मर्यादा तक की यात्रा

 

🌿 1. स्मरण का स्वाभाविक उदय

🕉️ काव्य

जब-जब मर्यादा का अर्थ गूँजता,

जब-जब आदर्श की बात उठती है,

तब राम के संग-संग,

तुलसी की छाया स्वतः दिखती है।

📖 विवरणात्मक अनुच्छेद

जब भी आदर्श पुरुषोत्तम श्रीराम का स्मरण होता है, उनके साथ गोस्वामी तुलसीदास जी का नाम अपने आप श्रद्धा में उभर आता है। सामान्यतः हम तुलसीदास जी को एक सिद्ध, अलौकिक संत के रूप में देखते हैं और यह भूल जाते हैं कि संत बनने से पहले वे भी एक साधारण मनुष्य थे—भावनाओं से भरे, प्रेम में डूबे हुए और मोह के बंधनों से जकड़े हुए। उनकी महानता का रहस्य यही है कि वे कभी मनुष्य थे, और उन्होंने मनुष्यत्व को पार किया।

 

🌿 2. रामबोला — एक अकेला बचपन

🕉️ काव्य

नाम था रामबोला,

पर राम का सहारा न था।

बचपन ने बहुत जल्दी जाना,

अपनापन क्या होता है।

📖 विवरणात्मक अनुच्छेद

तुलसीदास जी का बाल्यकाल नाम था—रामबोला। जीवन ने उन्हें बहुत शीघ्र कठोरता से परिचित करा दिया। माता-पिता का साया बचपन में ही उठ गया। बालमन, जिसे सुरक्षा, स्नेह और स्थिरता चाहिए होती है, वह सब रामबोला ने बहुत पहले खो दिया। ऐसे जीवन में मनुष्य भीतर से रिक्त हो जाता है, और वही रिक्तता आगे चलकर गहरे लगाव की भूमि बनती है।

 

🌿 3. प्रेम का सहारा बन जाना

🕉️ काव्य

जब जीवन सूना होता है,

तब प्रेम संसार बन जाता है।

वह संबंध नहीं रहता,

वह जीवन का आधार बन जाता है।

📖 विवरणात्मक अनुच्छेद

जब ऐसे अकेले मनुष्य के जीवन में प्रेम आता है, तो वह केवल एक संबंध नहीं होता। वह सहारा बन जाता है, जीवन का केंद्र बन जाता है। रामबोला के जीवन में विवाह हुआ। पत्नी सुशील थीं, समझदार थीं। पर धीरे-धीरे प्रेम ने अपना संतुलन खो दिया। वह प्रेम नहीं रहा, आसक्ति बन गया। पत्नी के बिना जीवन सूना लगने लगा। मन कहीं टिकता नहीं था।

 

🌿 4. वियोग की एक रात

🕉️ काव्य

दिन बीत जाता है किसी तरह,

पर रात सत्य सामने लाती है।

रात समय नहीं होती,

वह मन की परीक्षा लेती है।

📖 विवरणात्मक अनुच्छेद

एक दिन पत्नी को मायके जाना पड़ा। कारण साधारण था, पर परिणाम असाधारण। रामबोला ने बाहरी रूप से सहमति दे दी, पर भीतर कुछ टूट गया। दिन तो जैसे-तैसे बीत गया, पर रात ने उनकी परीक्षा ली। आधी रात के बाद, जब पूरा गाँव गहरी नींद में था, रामबोला की आँखें जाग रही थीं। हृदय व्याकुल था, विवेक मौन था। न यह सोचा कि क्या उचित है, न यह कि क्या अनुचित।

 

🌿 5. अंधकार की यात्रा

🕉️ काव्य

अंधेरी राह, निर्जन पथ,

नदी का शोर, मन का कोलाहल।

बाहर से कम, भीतर से अधिक,

अंधकार था प्रबल।

📖 विवरणात्मक अनुच्छेद

वे उठे और चल पड़े। अंधेरी राह, निर्जन पथ, नदी का शोर—सब कुछ पार करते हुए। पर इन सबसे अधिक गहरा अंधकार उनके भीतर था। मोह में डूबा व्यक्ति न भय देखता है, न विवेक। वे ससुराल पहुँचे। द्वार बंद था। चारों ओर सन्नाटा।

 

🌿 6. साँप और रस्सी

🕉️ काव्य

जब मोह अंधा कर देता है,

तब मृत्यु भी सीढ़ी लगती है।

रस्सी समझा जो पकड़ा गया,

वही चेतावनी बनती है।

📖 विवरणात्मक अनुच्छेद

दीवार से लटकी हुई एक वस्तु दिखाई दी। रामबोला ने उसे रस्सी समझकर पकड़ लिया और ऊपर चढ़ गए। वह रस्सी नहीं थी—वह साँप था। यह घटना चमत्कार नहीं, चेतावनी है। जब मन विषय में अंधा हो जाए, तब मृत्यु भी साधन प्रतीत होने लगती है।

 

🌿 7. एक वाक्य, एक वज्र

🕉️ काव्य

न क्रोध था, न अपमान,

बस सत्य का एक वाक्य।

वही वाक्य बन गया,

जीवन का निर्णायक क्षण।

📖 विवरणात्मक अनुच्छेद

घर के भीतर पहुँचे। पत्नी जाग गईं। उन्होंने न शोर मचाया, न अपमान किया, न क्रोध दिखाया। उन्होंने केवल सत्य कहा—

“हाड़-मांस की देह मम, तापै ऐसी प्रीत।

ऐसी प्रीत जो राममय, होत न तौ भवभीत॥”

इसका अर्थ यह नहीं था कि प्रेम गलत है। अर्थ यह था कि यदि यही प्रेम भगवान राम से होता, तो यह जीवन बंधन नहीं, मुक्ति का मार्ग बन जाता।

 

🌿 8. भीतर का टूटना

🕉️ काव्य

न उत्तर बचा, न तर्क रहा,

न दोष किसी पर आया।

एक क्षण में गिर गया मोह,

और सत्य सामने आया।

📖 विवरणात्मक अनुच्छेद

उस एक क्षण में रामबोला भीतर से हिल गए। वर्षों की नींद टूट गई। मोह की परतें झरने लगीं। न कोई तर्क था, न कोई प्रतिवाद। बस मौन। उन्होंने न पत्नी को दोष दिया, न स्वयं को सही ठहराया।

 

🌿 9. प्रस्थान और जन्म

🕉️ काव्य

बाहर निकले राम नाम संग,

भीतर जन्मा नया प्रकाश।

वहीं रामबोला समाप्त हुआ,

वहीं तुलसीदास।

📖 विवरणात्मक अनुच्छेद

वे बाहर निकले और “राम-राम” का नाम जपते हुए अज्ञात पथ पर चल पड़े। उसी क्षण रामबोला का अंत हुआ और तुलसीदास का जन्म। बाद में पत्नी को अपने शब्दों की तीव्रता का बोध हुआ। उन्होंने पत्र लिखा। उत्तर में तुलसीदास जी ने लिखा—

“एक कटे श्रीराम संग, बाँधि जटा सिर केस।

मैंने चाखा प्रेम रस, पतनी के उपदेश॥”

अर्थात् —
अब मैंने राम का रस चख लिया है।
अब संसार का स्वाद फीका पड़ चुका है।

 

🌿 10. ग्रंथ और कृपा

🕉️ काव्य

यह कथा कठोरता की नहीं,

यह निकट कृपा की बात।

ईश्वर कभी सबसे पास से,

देते हैं जीवन-पाठ।

📖 विवरणात्मक अनुच्छेद

इसके बाद का जीवन तप, साधना, उपेक्षा, यात्राओं और अंततः रामचरितमानस के रूप में प्रकट हुआ—एक ऐसा ग्रंथ जिसने युगों को दिशा दी। यह कथा पत्नी की कठोरता की नहीं, उस कृपा की है, जो ईश्वर कभी-कभी हमारे सबसे निकट के व्यक्ति के माध्यम से दे देते हैं।

 

🌿 11. अंतिम प्रश्न

🕉️ काव्य

कथा नहीं यह, आईना है,

हर मन को जो दिखलाए।

जिस दिन स्वीकार हुआ सत्य,

रामबोला भीतर जागे।

📖 विवरणात्मक अनुच्छेद

अंत में प्रश्न हमारे लिए है—हम भी रोज़ सुनते हैं, पर क्या कभी स्वीकार करते हैं? क्योंकि जिस दिन स्वीकार कर लिया, उसी दिन हमारे भीतर भी कोई रामबोला जागेगा।

 

🌞🚩🚩 जय श्री राम 🚩🚩🌞