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🌼 जहाँ खोजो वहीं मिलें—परमात्मा की तीन परीक्षाएँ 🌼
(बुद्धि, भक्ति और विवेक की प्रेरक कथा)
✨ प्रस्तावना
संसार में ईश्वर की खोज कभी आकाश में की जाती है,
कभी मंदिरों की सीढ़ियों पर,
कभी ग्रंथों के पन्नों में—
पर विरले ही लोग समझ पाते हैं कि
ईश्वर प्रश्नों से नहीं, अनुभूति से प्रकट होते हैं।
यह कथा है एक साधारण ब्राह्मण परिवार की,
और एक ऐसे बालक की—
जिसकी सरल बुद्धि ने
राजा के तीन कठिन प्रश्नों को
तीन जीवन-सत्य में बदल दिया।
जहाँ अहंकार झुक जाए, वहीं ज्ञान बोलता है,
जहाँ भक्ति जाग जाए, वहीं भगवान मिलता है।
🕉️ कथा
एक नगर में एक विद्वान ब्राह्मण रहता था।
वह घर-घर जाकर पूजा-पाठ करता
और उसी से अपने परिवार का पालन करता।
जीवन सादा था, पर मन शुद्ध।
एक दिन नगर के राजा के महल से बुलावा आया।
ब्राह्मण प्रसन्न मन से पहुँचा,
पूजा विधिपूर्वक सम्पन्न कराई—
मंत्रों की ध्वनि से महल का वातावरण पावन हो उठा।
जब ब्राह्मण विदा लेने लगा,
तभी राजा ने उसे रोककर पूछा—
“हे ब्राह्मण देव!
तुम नित्य भगवान की पूजा करते हो,
तो यह बताओ—
भगवान कहाँ रहते हैं?
उनकी दृष्टि किस ओर रहती है?
और भगवान क्या कर सकते हैं?”
ब्राह्मण यह सुनकर स्तब्ध रह गया।
ऐसे प्रश्न उसने कभी नहीं सोचे थे।
कुछ क्षण मौन रहकर बोला—
“महाराज!
इन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए
मुझे कुछ समय दीजिए।”
राजा ने एक माह का समय दे दिया।
🌧️ चिन्ता और समाधान
दिन बीतते गए…
पर उत्तर नहीं मिला।
ब्राह्मण की रातें बेचैन
और दिन उदास रहने लगे।
एक दिन उसका पुत्र—
तेजस्वी, शांत और समझदार—
पिता की चिंता भाँप गया।
“पिताजी,
आप इतने व्याकुल क्यों हैं?”
ब्राह्मण ने सब कह सुनाया।
पुत्र मुस्कराया और बोला—
“पिताजी, चिंता मत कीजिए।
राजा के प्रश्नों का उत्तर
मैं दूँगा।
आप मुझे साथ ले चलिए।”
🏰 राजसभा में प्रवेश
एक माह पूर्ण हुआ।
ब्राह्मण अपने पुत्र के साथ
राजमहल पहुँचा।
राजा ने कहा—
“ब्राह्मण देव!
मेरे प्रश्नों के उत्तर मिले?”
ब्राह्मण ने विनम्रता से कहा—
“महाराज,
इनका उत्तर मेरा पुत्र देगा।”
राजा ने बालक की ओर देखा
और वही तीन प्रश्न दोहराए।
🥛 पहला उत्तर — भगवान कहाँ रहते हैं?
बालक ने विनम्रता से पूछा—
“महाराज,
क्या आपके राज्य में
अतिथि का आदर पहले नहीं किया जाता?”
राजा लज्जित हुआ।
तुरन्त बालक को आसन दिया गया,
सेवक दूध का गिलास ले आया।
बालक ने दूध में उँगली डाली,
घुमाया, बाहर निकालकर देखने लगा।
राजा ने पूछा—
“यह क्या कर रहे हो?”
बालक बोला—
“सुना है दूध में मक्खन होता है,
पर मुझे तो दिख नहीं रहा।”
राजा मुस्कराया—
“मक्खन दिखता नहीं।
दूध जमाकर दही बनाओ,
फिर दही को मथो—
तभी मक्खन मिलेगा।”
बालक ने कहा—
“महाराज!
यही आपके पहले प्रश्न का उत्तर है।
जिस प्रकार दूध में मक्खन छिपा होता है,
उसी प्रकार परमात्मा
हर जीव के हृदय में विद्यमान हैं।
उन्हें पाने के लिए
भक्ति रूपी मंथन आवश्यक है।”
दिखता नहीं जो आँखों से,
वह मिलता है अंतर-ज्ञान से।
🕯️ दूसरा उत्तर — भगवान किस ओर देखते हैं?
राजा ने अगला प्रश्न किया।
बालक बोला—
“महाराज,
एक मोमबत्ती मँगवाइए।”
मोमबत्ती जलाई गई।
बालक ने पूछा—
“बताइए,
इसकी रोशनी किस दिशा में है?”
राजा बोला—
“चारों ओर समान।”
बालक ने कहा—
“बस, यही उत्तर है।
परमात्मा सर्वदृष्टा हैं।
उनकी दृष्टि
सब पर समान रूप से रहती है—
वे हमारे कर्म देखते हैं,
पद या वैभव नहीं।”
भगवान आँख नहीं, विवेक देखते हैं,
कर्मों की भाषा ही उनसे बोलती है।
👑 तीसरा उत्तर — भगवान क्या कर सकते हैं?
राजा अब अत्यंत उत्सुक था।
बालक बोला—
“महाराज,
यदि आप सच में उत्तर चाहते हैं,
तो आप मेरी जगह आएँ
और मुझे अपना स्थान दें।”
राजा मान गया।
बालक सिंहासन पर बैठा,
और राजा नीचे खड़ा हो गया।
बालक बोला—
“महाराज!
यही आपके तीसरे प्रश्न का उत्तर है।
भगवान यह कर सकते हैं—
कि रंक को राजा
और राजा को रंक बना दें।
सत्ता, वैभव, पद—
सब क्षणिक हैं।
परमात्मा जब चाहे
सब उलट सकते हैं।”
राजा नतमस्तक हो गया।
🌸 परिणाम
राजा बालक की बुद्धि से अत्यंत प्रसन्न हुआ
और उसे अपना सलाहकार नियुक्त किया।
उस दिन से राजा का शासन
अहंकार नहीं,
विवेक और धर्म से चलने लगा।
🌼 भावार्थ (Explanation)
यह कथा सिखाती है कि—
पर उन्हें पाने का मार्ग
ज्ञान नहीं, भक्ति और विनम्रता है।
🪔 नीति / Moral
🌱 ईश्वर को पाने के लिए
हृदय का मंथन आवश्यक है।
🌱 अहंकार त्यागे बिना
ज्ञान प्रकट नहीं होता।
🌱 जो स्वयं को छोटा मानता है,
वही परमात्मा को पा लेता है।
जो भीतर झाँक ले, वही पा ले भगवान,
बाकी तो खोजते रह जाते हैं, नाम और पहचान।